कैबिनेट ने 100% अनाज के अनिवार्य जूट पैकेजिंग को मंजूरी दे दी
आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने जूट पैकेजिंग सामग्री (जेपीएम) अधिनियम, 1 9 87 के तहत अनिवार्य पैकेजिंग मानदंडों के दायरे को विस्तारित करने की मंजूरी दे दी है।
सीसीईए ने मंजूरी दे दी है कि 100 प्रतिशत अनाज और 20 प्रतिशत चीनी को विविध जूट बैग में अनिवार्य रूप से पैक किया जाएगा।
विविध जूट बैग में चीनी पैक करने का निर्णय जूट उद्योग के विविधीकरण को बढ़ावा देगा।
प्रारंभ में जेम पोर्टल पर रिवर्स नीलामी के माध्यम से अनाज पैकिंग के लिए जूट बैग के इंडेंट्स का 10 प्रतिशत रखा जाएगा।
सीसीईए ने 1450 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर 2017-2020 के दौरान छतरी योजना वायुमंडल और जलवायु अनुसंधान-मॉडलिंग निरीक्षण प्रणालियों और सेवाओं की नौ उप-योजनाओं की निरंतरता को भी मंजूरी दे दी।
इसे पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा अपने संस्थानों के माध्यम से लागू किया जाएगा अर्थात् भारत मौसम विज्ञान विभाग, भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान, मध्यम श्रेणी के लिए राष्ट्रीय मौसम मौसम पूर्वानुमान और महासागर सूचना सेवा के लिए भारतीय राष्ट्रीय केंद्र।
सीसीईए ने 2020-21 और उसके बाद के दौरान 130 करोड़ रुपये की वित्तीय प्रतिबद्धता के साथ एयरबोर्न रिसर्च के लिए राष्ट्रीय सुविधा की स्थापना को भी मंजूरी दे दी।
आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने जूट पैकेजिंग सामग्री (जेपीएम) अधिनियम, 1 9 87 के तहत अनिवार्य पैकेजिंग मानदंडों के दायरे को विस्तारित करने की मंजूरी दे दी है।
सीसीईए ने मंजूरी दे दी है कि 100 प्रतिशत अनाज और 20 प्रतिशत चीनी को विविध जूट बैग में अनिवार्य रूप से पैक किया जाएगा।
विविध जूट बैग में चीनी पैक करने का निर्णय जूट उद्योग के विविधीकरण को बढ़ावा देगा।
प्रारंभ में जेम पोर्टल पर रिवर्स नीलामी के माध्यम से अनाज पैकिंग के लिए जूट बैग के इंडेंट्स का 10 प्रतिशत रखा जाएगा।
सीसीईए ने 1450 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर 2017-2020 के दौरान छतरी योजना वायुमंडल और जलवायु अनुसंधान-मॉडलिंग निरीक्षण प्रणालियों और सेवाओं की नौ उप-योजनाओं की निरंतरता को भी मंजूरी दे दी।
इसे पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा अपने संस्थानों के माध्यम से लागू किया जाएगा अर्थात् भारत मौसम विज्ञान विभाग, भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान, मध्यम श्रेणी के लिए राष्ट्रीय मौसम मौसम पूर्वानुमान और महासागर सूचना सेवा के लिए भारतीय राष्ट्रीय केंद्र।
सीसीईए ने 2020-21 और उसके बाद के दौरान 130 करोड़ रुपये की वित्तीय प्रतिबद्धता के साथ एयरबोर्न रिसर्च के लिए राष्ट्रीय सुविधा की स्थापना को भी मंजूरी दे दी।
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